अखिल भारतीय आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका फेडरेशन ने की हड़ताल ।।

अखिल भारतीय आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका फेडरेशन का आह्वान
26 नवंबर की हड़ताल सफल करो
नई शिक्षा नीति 2020: आंगनवाड़ी आईसीडीएस और ईसीसीई को खत्म करने की साजिश का विरोध करो
जब से नई शिक्षा नीति 2020 को स्वीकार किया गया है हमारी सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स विशेषकर वह जो ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं उनके दिल में यह उम्मीद जाग गई है कि जल्दी ही उन्हें सरकारी स्कूलों में नर्सरी टीचर की तरह स्थाई कर्मचारी के रूप में नियमित कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार सरकार के मंत्रियों राज्य के मंत्रियों शासक पार्टी के नेताओं और अनेकों विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे सरकारी अधिकारियों के इस तरह के बयान आ रहे हैं और अखबारों में भी इस तरह की खबरें आ रही हैं की आंगनवाड़ी स्कूल मैं बदल दी जाएंगी और आंगनवाड़ी वर्कर को अध्यापक के रूप में तरक्की कर दी जाएगी।
इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि जुझारू आंगनवाड़ी वर्कर्स को संघर्ष से दूर करने के लिए सरकार ने इस नीति को क्यों लागू किया है।
क्या नई शिक्षा नीति वास्तव में आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत बनाएगी क्या यह 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सहायक होगी ।
दरअसल, भारतीय शिक्षा व्यवस्था को वैज्ञानिक चिंतन और तार्किकता से बहुत दूर करके इसका कोरपोरेटकरण, व्यवसाईकरण, व्यापारिकता, केंद्रीकरण तथा सांप्रदायिकरण, शिक्षा को व्यापार का माल बनाने, तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप मजदूर पैदा करने के लिए इस नई शिक्षा नीति कों लाया गया है। लेकिन अभी हम इन मुद्दों पर बात ना करके नई शिक्षा नीति में ई सी सी ई अर्थात बचपन की शिक्षा और देखभाल पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते हुए नई शिक्षा नीति के प्रस्तावों का विश्लेषण करते हैं।
बचपन की देखभाल और शिक्षा ( ईसीसी ई)
सारी दुनिया के अंदर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में ” प्रीस्कूल एजुकेशन ” यानी स्कूल पूर्व शिक्षा का सिद्धांत जिसमें बच्चों को अक्षर, शब्द, गणित पढ़ाया जाता है बिल्कुल ही अवैज्ञानिक और अतार्किक माना जाता है।
वैज्ञानिक आधार पर प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा (मबबम) का सिद्धांत है कि बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए उनके पड़ोस में ही पोषण,स्वास्थ्य, अनौपचारिक शिक्षा को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ दिया जाए।
हमारे देश में जबकि कुपोषण से जुड़ी बौनापन , अति कुपोषित और एनीमिया जैसी चुनौतियां एक राष्ट्रीय चुनौतियां बन गई है वहां आईसीडीएस की सेवाएं और आंगनवाड़ी यानी आंगन में ही फुलवाड़ी के रूप में आईसीडीएस को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि वह इस राष्ट्रीय चुनौती से समग्र रूप से निपट सकें।बुनियादी सुविधाओं और संसाधन की कमी के बावजूद आंगनवाड़ी बहुत सक्सेसफुल बहुत सफल रही हैं।
बच्चों के लिए ईसीसीई का अधिकार यानी भोजन स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार का लंबा संघर्ष , और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुणवत्तापूर्ण आंगनवाड़ी को एक हजार की आबादी पर खोलने का आदेश , तब जाकर भारत ने 2013 में ई सी सी सी सी नीति को लागू किया। इसी के अनुसार पाठ्यचर्या सिलेबस प्रशिक्षण मॉड्यूल आदि एनसीईआरटी द्वारा महिला और बाल विकास मंत्रालय के लिए विकसित किए गए।
इस सामग्री के द्वारा देश के 13.8 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में लगभग 27 लाख आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर पिछले 45 सालों से बच्चों को ईसीसी के अंतर्गत पढ़ा रहे हैं।
लेकिन आश्चर्य की बात है कि नई शिक्षा नीति 2020 देश की ईसीसीई पॉलिसी 2013 पर बिल्कुल खामोश है जबकि नई शिक्षा नीति में प्रीस्कूल व्यवस्था की रटने की प्रकृति पर और समस्याओं पर बात की है।लेकिन नई शिक्षा नीति इस मुद्दे पर बिल्कुल शांत है ।
यहां तक की इस नीति ने स्कूल रेडिनस और साक्षरता और गणित पर ज्यादा जोर दिया है । यह कहती है की आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूल के साथ एक क्लस्टर बना दिया जाएगा लेकिन कैसे किया जाएगा यह इसमें नहीं बताया क्या है । पिछले एक साल में देश भर के विभिन्न राज्यों का अनुभव यह दिखाता है कि चार या पांच आंगनवाड़ी केंद्रों को एक ही स्कूल के एक कमरे में तक सीमित कर दिया गया है।
अगर इस नीति को लागू कर दिया गया तो यह 1000 की आबादी पर पड़ोस के आंगन में खुली आंगनवाड़ी को, वह आंगनवाड़ी जॉब अपनी एक हजार की आबादी के बीच में गहरा संबंध उन परिवारों के साथ रखती है हाउस विजिट में जाती है फॉलोअप करती है और माता-पिता को शिक्षा भी देती हैं। ये नीति शिक्षा व्यवस्था में गहराई के साथ जुड़े नर्सरी और किंडर गार्डन प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूलों को मान्यता देने के लिए ही लाई गई है।
3 से 6 साल के बच्चों को ईसीसी का अधिकार नहीं:-
नई शिक्षा नीति 2019 में 3 से 6 साल तक के बच्चों को शिक्षा अधिकार कानून में शामिल करने की बात बहुत जोर से कही गई थी लेकिन नई शिक्षा नीति 2020 में इस विचार को त्याग दिया गया है यहां तक की नई शिक्षा नीति 2020 मुफ्त और अनिवार्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कानून पर बात भी नहीं करती है। सभी की शिक्षा के बजाय यह नीति सभी तक शिक्षा की पहुंच बनाने की बात करती है।
इस नीति के अनुसार प्रवासी मजदूरों और अन्य ड्रॉपआउट बच्चों को पहले से ही मौजूद सरकारी आंगनवाड़ी में प्रवेश और रोके जाने के बजाए सिविल सोसायटी के सहयोग से बने वैकल्पिक और नवोन्मेष शिक्षा केंद्रों में भेजा जाएगा। इस नई शिक्षा नीति के अनुसार गारंटीड मुफ्त और अनिवार्य ईसीसी नहीं होगी।
आंगनवाड़ी के स्थान पर बाल वाटिका:-
नई शिक्षा नीति के दस्तावेज के अनुसार सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों की कमियों को दूर करने इन्हें बुनियादी सुविधाएं देने तथा वर्कर्स के प्रशिक्षण के स्थान पर एक नए विचार को सामने लाई है और वह विचार है बाल वाटिका का। इस विचार के अनुसार 5 साल से कम के प्रत्येक बच्चे को एक तैयारी की कक्षा या बाल वाटिका (कक्षा एक से पहले) में रखा जाएगा, एक मबबम का प्रक्षिशित टीचर वहां रखा जाएगा। इस दस्तावेज के अनुसार बाल वाटिका में प्रवेश की आयु 5 साल से कम अर्थात 3 साल भी हो सकती है यह दस्तावेज इस बात पर कोई रोशनी नहीं डालता की बाल वाटिका क्या अलग से होंगी क्या स्कूल के अंदर होंगी और आंगनबाड़ी के संबंध में इनकी भूमिका क्या होगी अगर 5 साल से कम का बच्चा बाल वाटिका में जाता है तो फिर आंगनवाड़ी में कौन जाएगा यह और कुछ नहीं बल्कि औपचारिक रूप से चल रहे प्री स्कूलों को और उनके प्रशिक्षित अध्यापकों को मान्यता देने का ही एक तरीका है प्रस्तावित बाल वाटिका की कोई जरूरत नहीं है यह स्कूलों में पहले से ही चल रही नर्सरी और केजी क्लास को मान्यता देने का ड्रामा है।
ईसीसीई प्रशिक्षित अध्यापक का कैडर बनाम:-
प्रशिक्षित आंगनवाड़ी वर्कर यह दस्तावेज कहता है की आंगनवाड़ी वर्कर्स की प्री स्कूल शिक्षा के लिए शिक्षा विभाग द्वारा ट्रेनिंग कराई जाएगी लेकिन यह नीति लंबे समय के लिए ईसीसीई कैडर के लिए भी प्रस्ताव करती है। यह दस्तावेज बाल वाटिका में एसीसी के प्रशिक्षित अध्यापकों की बात करता है लेकिन यह इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं करता है कि आंगनवाड़ी वर्कर जो प्रशिक्षित है क्या उन्हें भी प्रशिक्षित अध्यापकों के रूप में रखा जाएगा या नहीं। यह दस्तावेज कहता है कि सभी आंगनवाड़ी को स्कूल व्यवस्था के साथ जोड़ दिया जाएगा।
अगर हम इस को समग्रता के साथ पढ़ें तो इस दस्तावेज के अनुसार यह समझा जा सकता है कि आंगनवाड़ी केंद्रों को बाल वाटिका के द्वारा खत्म कर दिया जाएगा और इन बाल वाटिका में ट्रेनड टीचर होंगे और आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर का कोई नामोनिशान नहीं रहेगा।
आंगनवाड़ी हेल्पर के लिए कोई भूमिका नहीं:-
ईसीसीई अक्षर ज्ञान या गणित की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं है यह बच्चे के समग्र विकास का एक सिद्धांत है जहां बच्चा बहुत सारे कौशल और ज्ञान अपने परिवेश से सीखता है । आंगनबाड़ी के अंदर बच्चा स्वास्थ्य सफाई भागीदारी दूसरों के साथ अपनी चीजों को कैसे बाटे, अपनी चीजों को कैसे संभाल कर रखें और अपने चारों तरफ के लोगों से कैसे व्यवहार करें यह सीखता है और सीखने की इस प्रक्रिया में आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर की भूमिका है। आंगनवाड़ी वर्कर अपने केंद्र पर मिली अन्य जिम्मेदारियों स्वास्थ्य और पोषण के कार्य के अतिरिक्त इस ईसीसी के काम को भी संभालती है आंगनबाड़ी के इस महत्वपूर्ण पहलुओं को इस डॉक्यूमेंट में कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है यहां तक कि किसी एक जगह भी आंगनवाड़ी हेल्पर का कोई जिक्र नहीं है इससे हमारी यह बात और हमारा डर सही साबित होता है की नई शिक्षा नीति 2020 औपचारिक शिक्षा को ही आगे बढ़ाने का मॉडल है और इसमें आंगनवाड़ी की कोई जगह नहीं है।
कुपोषण और पूरक पोषण हमारे देश में आधे से ज्यादा बच्चे कुपोषित बोने अति कुपोषित और एनीमिया के शिकार हैं विशेषकर 6 साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण की स्थिति बहुत भयंकर है और यह हमारे देश के सामने यह बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ा है। नई शिक्षा नीति के इस दस्तावेज में कुपोषण का जिक्र किया गया है और इसे दूर करने के लिए मॉर्निंग स्नैक्स देने की भी बात की गई है लेकिन इसमें कहीं भी इस बात का जरा सा भी जिक्र नहीं है कि कुपोषण दूर करने के लिए आईसीडीएस या एमडीएम मिड डे मील स्कीम को बुनियादी तौर पर मजबूत बनाया जाएगा बल्कि इस ओर इशारा किया गया है कि प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता सलाहकारों और समुदाय की भागीदारी से मध्याह्न भोजन और पूरक पोषाहार का निजीकरण किया जाएगा।
उचित फंड देकर और इन वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देकर इन स्कीमों को मजबूत करने की बजाय सलाहकारों और सामुदायिक भागीदारी शुरू करने का सिर्फ एक ही अर्थ निकलता है कि इन स्कीमों का निजीकरण किया जाएगा ।
बाल देखभाल और क्रेचः-
शिशु के जन्म के 1000 दिनों के अंदर मिली उसकी देखभाल की गई उसके जीवन पर बड़ा असर डालती है और बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है 1000 दिन की दीवार है जिस पर बच्चे का भावी विकास उसकी शिक्षा निर्भर करती है इसी के बारे में बात करते हुए जीरो से 3 साल के बच्चों की भी इन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है इसके अलावा यह एक बहुत बड़ी मांग है महिला और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की, की सभी कामकाजी महिलाओं चाहे वह संगठित क्षेत्र में काम करें, क्षेत्र में महिलाओं को 3 साल से कम उम्र के बच्चों की विकास पोषण और देखभाल की आवश्यक सेवाएं आईसीडीएस आंगनवाड़ी द्वारा ही पूरी होती हैं नई शिक्षा नीति 2020 के अंदर ईसीसी के अंदर प्रस्तावित बदलाव 0 से 3 साल तक के बच्चों को मिल रही देव पाल और सेवा को पूरी तरह से तहस-नहस कर देंगे।
पीपीपी प्राइवेट फिलैंथरोपिक पार्टनरशिप:-
पहले सरकार पी पी के नाम पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की बात करती थी अब सरकार नया शब्द लाई है प्राइवेट फिलैंथरोपिक भागीदारी नई शिक्षा नीति 2020 पीपीपी के नाम पर शिक्षा के हर मुद्दे को हर भाग का निजीकरण कर दिया है यह निजीकरण करके सरकार सभी को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हट रही है। इस नीति के अनुसार प्री प्राइमरी स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा के संस्थान तक शिक्षा पाठ्यचर्या पुस्तकों की तैयारी आदि सभी कुछ निजी हाथों में पहुंच जाएगा और इस तरह से बाजारी ताकते कॉरपोरेट सांप्रदायिक और धार्मिक संस्थान शिक्षा के हर क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे।
बजट आवंटन पर पूरी तरह चुप्पी:-
नई शिक्षा नीति 2020 में जीडीपी का 6ः शिक्षा पर खर्च करने की बात तो बड़े जोर शोर से कही है लेकिन इसके लिए आवश्यक बजट आवंटन का कहीं भी जिक्र नहीं किया है इसका पूरा जोर प्राइवेट फाइनेंस ऑफिस पार्टनरशिप यानी पीपीपी पर है इसका मतलब यह निकलता है कि जीडीपी का 6 परसेंट का अर्थ सरकार द्वारा ही सिर्फ खर्च करना नहीं है इसी तरह आईसीडीएस मिशन का डॉक्यूमेंट कहता है कि आंगनवाड़ी के लिए ईसीसी का जो बजट है वह निजी प्राइवेट नर्सरी स्कूलों को दिया जा सकता है इसी तरह न्यूट्रिशन का पैसा भी निजी संस्थाओं को दिया जा सकता है।
पंजाब का अनुभव पंजाब राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में नर्सरी स्कूल खोल दिए हैं इसके बारे में ना तो उन्होंने इन स्कूलों के प्रभाव के बारे में कोई अध्ययन किया ना ही उन्होंने महिला और बाल विकास मंत्रालय जो आंगनवाड़ी चलाता है उससे भी कोई सलाह नहीं दी प्रदेश में आंगनबाड़ी यूनियन ने कठिन संघर्षों के बाद सरकार को यह कदम वापस लेना पड़ा और वह इस बात पर सहमत हुई कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को स्कूलों में शिफ्ट नहीं किया जाएगा बल्कि आंगनवाड़ी केंद्रों में ही उन्हें बेहतरीन स्कूल पूर्व शिक्षा दी जाएगी।
अब एक बार फिर से नई शिक्षा नीति 2020 आने के बाद पंजाब की सरकार ने सरकारी स्कूलों में नर्सरी स्कूल खोलने शुरू कर दिए हैं तथा 8500 नर्सरी टीचर की पोस्ट निकाल दी हैं इन पोस्ट पर किसी भी आंगनवाड़ी वर्कर को नहीं रखा जा रहा है सरकार इन प्राइमरी नर्सरी स्कूल के बच्चों को यूनिफॉर्म और पढ़ने लिखने की सामग्री भी दे रही है।
सरकार जो आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाएं उपलब्ध कराती है वह केंद्र के किराए तक कुत्तों का तो समय पर भुगतान नहीं करती है लेकिन नर्सरी स्कूल के बच्चों को हर सुविधा देने के लिए तैयार है यहां इस बात को रेखांकित किया जाना जरूरी है कि पंजाब के सरकारी स्कूल व्यवस्था में नियमित शिक्षकों पर भर्ती बंद हो गई है संविदा के शिक्षकों को भी समय से सैलरी नहीं मिल रही है ऐसे में आंगनवाड़ी प्री प्राइमरी के बच्चों को और उनके अध्यापकों को यह किस प्रकार नियमित भुगतान करेंगे आखिरकार इनका यही होगा कि आंगनबाड़ी केंद्र जब बंद हो जाएंगे और सरकारी स्कूल में भी व्यवस्था आएंगे तो निजी स्कूलों को खुला मैदान मुनाफा कमाने के लिए मिल जाएगा।
नई शिक्षा नीति 2020 हमें मंजूर नहीं बच्चों को इस इसी सी ई का अधिकार दो आईसीडीएस को मजबूत करो
सरकार आईसीडीएस के विभिन्न भागों जैसे पूरक पोषाहार और प्री प्राइमरी के नाम पर विभिन्न कारपोरेट कंपनियों जैसे वेदांत एनजीओ जैसे अक्षय पात्र नंदी फाउंडेशन आदि से करार कर रही है न्यूट्रिशन मिशन ने भी आंगनवाड़ी में नियमित पोषण पोषाहार सप्लाई के लिए कोई आवंटन नहीं किया है शिक्षा और प्रशिक्षण में भी एनजीओ को शामिल किया जा रहा है इसीलिए दूसरों का बजट लगातार किया जा रहा है इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि नहीं 2020 आंगनबाड़ी के स्कोर पूरी तरह से निजी स्कूल व्यवस्था करना चाहती है तथा आंगनबाड़ी को खत्म करके परिदृश्य में ऑल इंडिया फेडरेशन का विरोध करती है तथा 26 नवंबर 2020 की हड़ताल में इस नीति को वापस लेने का पुरजोर समर्थन करती है हम मांग करते हैं कि
नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लो क्योंकि यह शिक्षा नीति केंद्रीकरण व्यवसायीकरण सांप्रदायिक करण को बढ़ाती है।
औपचारिक स्कूल ही व्यवस्था से जोड़कर ईसीसी के विचार को समाप्त मत करो
6 साल की उम्र के 6 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को ईसीसी का अधिकार के लिए अलग से कानून बनाओ जिसमें आंगनवाड़ी को नोडल एजेंसी बनाओ ई सी सी पॉलिसी को मजबूत बनाओ।
ईसीसीई को सिर्फ आंगनवाड़ी द्वारा दिया जाना चाहिए, ये मुफ्त और अनिवार्य होनी चाहिए, कोई भी मॉडल ईसीसीई सेंटर या बाल वाटिका हमें मंजूर नहीं है।
सरकारी स्कूल में कोई भी प्री स्कूल में नर्सरी स्कूल ना खोला जाए ना ही कहीं अकेला प्री स्कूल की परमिशन मिलनी चाहिए।
वर्तमान में चल रहे निजी प्राइवेट प्री प्राइमरी स्कूलों के लिए सख्त नियंत्रण होना चाहिए उन सभी को आंगनवाड़ी के मॉडल पर विकसित करना चाहिए और मुफ्त होना चाहिए इन केंद्रों पर अध्यापकों के कामकाज के हालात अच्छे हो तथा न्यूनतम वेतन सामाजिक सुरक्षा आदि मिलनी चाहिए।
दो साल के अंदर आंगनवाड़ी केंद्रों में उच्च गुणवत्ता का बुनियादी सुविधाएं खेल का सामान प्रशिक्षित आंगनवाड़ी वर्कर टीचर सहायिका द्वारा मजबूत बनाया जाना चाहिए हर आंगनवाड़ी में हवादार बच्चों के लिए सुविधा युक्त बिल्डिंग तथा सीखने का वातावरण होना चाहिए इसके लिए उच्च बचत बजट आवंटित किया जाए
आंगनवाड़ी केंद्रों को आंगनवाड़ी शहर में पर्याप्त स्टाफ के साथ विकसित किया जाए
आंगनवाड़ी सहायिका की भूमिका को भी मान्यता दी जाए तथा ईसीसी के अंतर्गत उनका भी प्रशिक्षण कराया जाए
आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर को नियमित किया जाए और उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह सभी सुविधाएं या लाभ दिए जाएं
आंगनवाड़ी आईसीडीएस के किसी भी हिस्से का निजीकरण ना किया जाए।

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