स्कूल लौट चलें हम

CWS NEWS – सत्यप्रकाश नायक।

कोविड 19 के दुस्प्रभाव के चलते हमारी शिक्षाप्रणाली पर बहुत बुरा असर हुआ है|  सरकार  एवंस्वयं सेवी संस्थाओं के तमाम प्रयासों के बाबजूदभी बड़े निजी स्कूल (प्राइवेट) एवं सरकारी विद्यालयोंमें पढने वाले बच्चों  के बीच शैक्षणिक गुणवत्ता कीएक गहरी खाई जो लम्बे अरसे से बनी हुई थी वह इसमहामारी के चलते और बढती चली गई | सरकारीस्कूलों और छोटे प्राइवेट स्कूलों  में पढने वाले बच्चोंकी शिक्षा पर जो नकारात्मक असर हुआ है उसे पाटपाने में शायद लम्बा समय लगे | भारत में  जबकोरोना वायरस की वजह से लॉक डाउन लगा तोनागरिकों की तमाम चुनौतियों के साथ साथअकादमिक सत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ  |इस वर्षविद्यालय नही खुले और हजारों विद्यार्थी भी अपनेमाता पिता के साथ बड़े शहरों से वापिस अपने गाँवलौट आये |यूनिसेफ की हालियाँ  आई एक रिपोर्टकहती है  भारत के मात्र 24 प्रतिशत घरों में हीऑनलाइन शिक्षण हेतु इन्टरनेट की व्यवस्था है |यूनिसेफ की  लर्निंग रीचेबिलिटी रिपोर्ट’ में जो तथ्यनिकल कर  आये हैं वह भारत में शिक्षा व्ययवस्था मेंहो रहे बड़े गेप को दर्शाती है |रिपोर्ट कहती है की जहाँकेवल 24 प्रतिशत परिवारों तक इन्टरनेट सेवा पहुचरही है उसमें उच्च वर्गीय ,माध्यम वर्गीय और निम्नवर्गीय आय के परिवारों के बीच  बड़ा अंतर है साथ हीसाथ यह लैंगिक विभाजन भी करता है | निम्न आयके परिवारों के पास या तो स्मार्ट फोन नही है औरयदि हैं तो उनमें इन्टरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भीहै दूसरी ओर लड़कियों के पास स्मार्ट फोन लड़कों कीअपेक्षाकृत कम हैं जो जेंडर गैप पैदा करता है |ग्रामीण अंचलों में जहाँ निम्न आय वर्ग में परिवारज्यादा हैं उन्हें स्मार्ट फोन ,इन्टरनेट कनेक्टिविटी केसाथ साथ शिक्षण सामग्री का उनकी भाषा मेंउपलब्ध न होना भी एक चुनौती बनी हुई है |रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘भारत में 15 लाख से अधिक स्कूल महामारी के कारण बंद हैं, जिसके कारण पूर्व-प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के 28.6 करोड़ बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है, जिनमें 49 प्रतिशत लड़कियां शामिल हैं|60 लाख लड़के एवं लड़कियां कोविड-19 के पहले से ही स्कूल से बाहर थे.यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने समुदायों, माता-पिता और स्वयंसेवकों के साथ बच्चों तक पहुंचने और इस समय उनकी पढ़ाई में सहायता करने के लिए संयुक्त दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है |

यास्मीन कहती हैं की ‘‘हम जानते हैं कि किसी भी संकट में बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं स्कूल बंद हैं, माता-पिता के पास रोजगार नहीं हैं और परिवार तनाव से गुजर रहे हैं.बच्चों की एक पूरी पीढ़ी ने उनकी शिक्षा और पढ़ाई बाधित होते देखा है.”वोकहती हैं कि  ‘‘डिजिटल शिक्षा तक पहुंच सीमित है और इसके जरिये सीखने के अंतर को हल नहीं किया जा सकता है.संकट के इन समयों में बच्चों तक पहुंचने के लिए समुदायों, माता-पिता, स्वयंसेवकों को शामिल कर एक मिश्रित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है.” हालाँकि केंद्र एवं राज्य सरकारों नेदूरस्थ ऑनलाइन शिक्षा और ऑफलाइन शिक्षा केद्वारा छात्रों को जोड़ने के काफी प्रयास किये हैं परन्तुजमीनी हकीकत पर यह नाकाफी दिखाई देतेहैं क्योंकि यह संकट लाखों बच्चों के भविष्य पर मंडरारहा है और गरीब और अमीर की खाई को और बड़ाकर रहा है |जहाँ पूरे देश में अनलॉक की प्रक्रिया तेजीसे बढ़ी है और लॉक डाउन पूर्णतया हटा दिया गया हैवहाँ सिर्फ शिक्षा पर ही लॉक डाउन लगा कर हमगरीब और मध्यम वर्ग के साथ एक बड़ा अन्याय करेंगे| राज्य एवं केंद्र सरकारों को यथाशीघ्र ही तमामसावधानियों के साथ स्कूलों को खोल देना चाहिएजिसके लिए कुछ सुझाव यहाँ पर दिए जा रहे हैं –

1. स्कूल को 2 पारियों  में संचालित किया जाये प्रत्येक पारी में दर्ज सख्या के अनुसार आधे बच्चोंको स्कूल  बुलाया जाये |

2. पहली पारी सुबह 8 बजे से 12 बजे तक औरदूसरी पारी 12 :30 से 4:30 तक हो |

3. कोविड 19 से बचाव के दिशानिर्देशों क पालन हेतु समस्त शैक्षणिक स्टाफ को 1 दिवसीय प्रशिक्षण करवाया जाए |

4. नामांकन संख्या अधिक होने पर सोम ,बुध औरशुक्रवार  को आधे बच्चे और मंगल ,बृहस्पतिवार और शनिवार को बाकि के आधे बच्चे विद्यालयबुलाये जाएँ |

5. दूरस्थ या निर्जन इलाकों से आने वाली बालिकाओंकी सुरक्षा हेतु व्यवस्था की जाये |

6. मिड के मील के अलावा विद्यालय में नाश्ते का भीप्रबंध हो ताकि बच्चों को सुबह विद्यालय आने याशाम को  जाते शाम किसी परेशानी का सामना नकरना पड़े |

7. अधिक से अधिक स्वयसेवी संगठनो को एवं CSRकंपनियों को शिक्षा में सीधे तौर  पर सहयोगकरने की आवश्यकता है |

8.लॉक डाउन के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से दूर हुए हैं जिन्हें विद्यालय वापिस लाने के लिए स्कूल लौट चलें हम अभियान को जोर शोर से चलने की आवश्यकता है और इसमें राज्य सरकार से अनुरोध है की शिक्षा विभाग के साथ साथ अन्य शासकीय विभागों  एवं स्वयंसेवी संस्थाओं  की मदद ली जाए |

9.जो बच्चे अन्य शहरों से लौट कर आये हैं और उनके पास स्थानांतरण प्रमाणपत्र या पिछली कक्षा की मार्कशीट नही है उन्हें सेल्फ डिक्लेरेशन करवा कर तुरंत एडमिशन दिया जाये |

10.विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं अन्य सुविधाओं की सही स्तिथि का पता लगाने के लिए थर्ड पार्टी असेसमेंट करवाया जाये और उसके अनुसार आगे की कार्य योजना तय की जाये|

11.गाँव एवं मोहल्ला स्तर पर पुस्तकालय खोलने की एक राष्ट्रव्यापी निति बने ताकि अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ सकें |

भारत का भविष्य आज विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का इंतजार कर रहा है जिसे उसका मौलिक अधिकार जितनी जल्द मिले बेहतर होगा |सुझाव बहुत है और उसके लिए सरकार एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के पास बेहतर थिंक टैंक भी उपलब्ध हैं जरूरत है एक द्रण इच्छा शक्ति की और उसे  लागू करने के लिए बेहतर सोच की |

सत्य प्रकाश नायक (लेखक पिछले 10 वर्षों से शिक्षा एवं सामाजिक सरोकार के कार्यों से जुड़े हुए हैं और सामाजिक चेतना लाने के लिए प्रयासरत हैं )

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