बेघर हुई 80 साल की बुजुर्ग माँ का सहारा बने यूथ विंग समर्पण के अध्यक्ष आशीष माना ठाकुर, बरघाट ले जाकर वृद्धाश्रम में करवाया दाखिल

बेघर हुई 80 साल की बुजुर्ग माँ का सहारा बने आशीष माना ठाकुर बरघाट ले जाकर वृद्धाश्रम में करवाया दाखिल

खून के रिश्ते से बढ़कर होता है इंसानियत का रिश्ता

सिवनी:- इस जीवन में हर किसी व्यक्ति को एक जीवन साथी या मित्र की आवश्यकता होती है जो उससे हमेशा प्यार करें और जीवन भर का सहारा बने परंतु जीवन में एक बात तो सत्य है हर किसी प्रेम की तुलना में माता पिता का प्रेम सबसे ऊपर होता है। एक माता पिता के सहज और निर्मल प्रेम की किसी भी अन्य प्रेम से तुलना नहीं की जा सकती है। वहीं सिवनी के गंज क्षेत्र से चौकाने वाली ख़बर सामने आई जहाँ 80 साल की बुजुर्ग महिला सुभद्रा बाई को व्रद्धाअवस्था में उनके परिजनों ने घर से बेघर कर दिया । सुभद्रा बाई के द्वारा बताया गया कि उन्होंने अपना सारा जीवन अपने परिवार को समर्पित कर दिया लेकिन जब 80 साल की बुजुर्ग महिला के शरीर ने जबाब दे दिया जब वे घर का कोई काम नहीं कर पा रही थी तब उनके परिवार वालों में सुभद्रा बाई के साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार करके उन्हें एक थैले में कुछ कपड़ों के साथ घर से निकाल दिया । इतनी कड़कड़ाती हुई ठंड के दिनों में जहाँ रहना मुश्किल होता है वही इस बूढ़ी माँ को 3 दिनों तक भटकना पड़ा भटकते हुए जब किसी सज्जन ने सुभद्रा बाई को इस हालत में देखा तब उन्होंने उस बुजुर्ग महिला की मदद करते हुए यूथ विंग समर्पण युवा संगठन के अध्यक्ष आशीष माना ठाकुर के घर का पता दिया इसके बाद सुभद्रा बाई आशीष माना ठाकुर के घर पहुँची जहाँ उनके साथ हुई घटना की सारी जानकारी संगठन अध्यक्ष को दी संगठन अध्यक्ष आशीष माना ठाकुर के द्वारा बताया गया कि बुजुर्ग महिला की दांस्ता सुनकर वह आश्चर्य चकित हो गए और उन्होंने बुजुर्ग महिला की हालात को देखते हुए सबसे पहले खाना खिलाया और उस महिला को स्वयं के घर मे ही ठहरा कर सुभद्रा बाई के परिजनों से मिलने गए लेकिन उनके घर मे ताला पड़ा देख वह लौट आये लगभग दो दिनों के इंतजार के बाद आशीष माना ठाकुर के द्वारा सिवनी के व्रद्धाश्रम में बुजुर्ग महिला को दाखिल करने हेतु आवेदन किया गया किंतु सिवनी व्रद्धाश्रम में जगह न होने के कारण दाखिला नहीं मिल पाया और इस बात से मायूस न होते हुए बरघाट के वृद्धाश्रम में संपर्क किया गया जहाँ आशीष माना ठाकुर और उनके कुछ सदस्यों द्वारा बुजुर्ग महिला को ठंड से बचने हेतु गर्म कपड़े दिलाये गए और ससम्मान उन्हें सिवनी से ले जाया गया जहाँ बरघाट के व्रद्धाश्रम में दाखिल करवाया गया बुजुर्ग महिला को दाखिला दिलाने के बाद जब वापसी का समय हुआ तब वह बहुत ही भावुक पल था क्योंकि उस बूढ़ी माँ की आंखों में कई यादों के आंसू थे । जब रोते हुए आशीष के सर पर हाँथ रखकर बुजुर्ग महिला ने दुआएँ दी तब सभी की आंखों में आंसू छलक उठे संगठन अध्यक्ष सहित सदस्यों ने बूढ़ी माँ के चरण स्पर्श किये ओर उनके द्वारा आशीर्वाद प्राप्त किया। आशीष माना ठाकुर द्वारा इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से अपील की गई कि नये युग और नई तकनीकियों के साथ हम इतना आगे न निकल जाएं कि माता – पिता का कर्ज हम भूल जाएं हम यह कोशिश करें कि हमारे माता पिता बुजर्गों को किसी भी अवस्था या किसी भी परिस्थितियों में हम उनके साथ हैं किसी भी प्रदेश या जिले और दुनिया में वृद्धाश्रम जैसाकोई नाम ही न हो क्योंकि माता-पिता की सेवा और देखभाल करने वाला व्यक्ति हमेशा जीवन में सफल होता है।रामायण में भगवान् श्री राम के माता-पिता की सेवा को कोई भूल नहीं सकता है। परन्तु अब एक ऐसा समय आ चूका है कि लोग पैसे और सफलता के पीछे ही भाग रहे हैं और माता-पिता को भूलते जा रहे हैं। कुछ ऐसे क्रूर संतान भी हैं जो माता-पिता को वृद्ध हो जाने पर वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं। लालत है ऐसे बच्चों को जो अपने माता-पिता के अंतिम समय में उन्हें छोड़ देते हैं। क्या इसी दिन के लिए वो माता-पिता अपनी जान न्योछावर करके उस संतान का लालन पालन करते हैं। हमारे लिए जिन कष्टों का सामना हमारे माता पिता करते हैं उसका वर्णन करना नामुमकिन है। इसीलिए माता-पिता की सेवा से भागना पाप है। माता पिता की सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती है। जिस संतान को माता-पिता की सेवा का अवसर मिले, तो समझ लीजिये वह बहुत भाग्यशाली है।


हर माता-पिता के मन में एक चाह होती है कि उनकी संतान वृद्धावस्था में उनका सहारा बने। जो लोग स्वयं के माता-पिता की सेवा नहीं करते हैं उनके बच्चे भी उनके साथ वैसा ही व्यवहार दिखाते हैं। हमें स्वयं अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए इससे हमारी आने वाली पीढ़ी के बच्चे भी वही सब सीखेंगे। कई बार देखने में आता है कुछ अशिक्षित माता-पिता को उनके शिक्षित संतान संभालने और ख्याल रखने से कतराते हैं भले ही माता-पिता जितने पुराने ढंग के रहने वाले हों वो हमारे माता पिता होते हैं और उन्हीं के कारण हम उस सफलता की जगह पर होते हैं। झूठे नकारात्मक लोगों की बातों को सुनने जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं करता है और उनका अपमान करता है उसे कभी भी जीवन में सुख-शांति प्राप्त नहीं होती है।

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