माँ बाला त्रिपुर सुंदरी।

माँ बाला त्रिपुर सुंदरी देवी की आराधना मात्र से हो जाती है मनोकामना पूर्ण,
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने किया था स्थापित,

सिवनी:-
जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर लखनादौन विकासखंड के अंतर्गत नेशनल हाईवे मार्ग पर गणेशगंज से पूर्व दिशा में 500 मीटर की ऊंचाइयों पर माँ बाला त्रिपुर सुंदरी देवी का मंदिर स्थापित हैं जहाँ माँ भगवती की आराधना मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाए पूर्ण हो जाती है।
यहाँ पर दोनों नवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है जिसमे श्रद्धालुओं द्वारा नवरात्रि पर अपनी मनोकामना पूर्ति के ज्योत कलश रखे जाते हैं एवं मंदिर समिति द्वारा पिछले 10 वर्षो से जस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाते रहा है इस वर्ष कोरोनावायरस के मद्देनजर जस प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जा रहा है।
मंदिर में नवरात्र शुरू होते ही भक्तगण माँ भगवती की आराधना में लीन हो जाते हैं और जिले से ही नही अपितु आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करने पहुचते हैं।

मंदिर के पुजारी ब्रम्हचारी राघवानंद ने बताया कि यह मंदिर बहुत पुराना है और गुरुजी ने इस मंदिर को खंडहर में देखा तो गुरुजी ने आकर सन1984 में माँ भगवती त्रिपुर सुंदरी देवी की प्राण प्रतिष्ठा की एवं पुज्य महाराज द्विपीठाधीस्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के कर कमलों से 9 जून सन2010 में इसका जीर्णोद्धार किया गया तब यहा बहुत बड़ा यज्ञ किया था एवं कार्यक्रम 9 दिनों तक हुआ उसके बाद जो भगवती की पुरानी प्रतिमा हैं उसे पीछे एक छोटे मन्दिर में स्थापित किया गया हैं एवं जो नई भगवती की प्रतिमा आयी हैं यह 8 वर्ष की कन्या माँ बाला भवानी की भगवती राज राजेशश्वरी त्रिपुर सुंदरी देवी की बेटी हैं एवं मंदिर में इनके साथ प्रथम पूज्य भगवान गणेश एवं 9 देवियो ओर सर्व सिद्धि हनुमान जी की भी स्थापना की गई है जो परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
ब्रम्हचारी जी ने बताया कि गुरुजी बताते हैं की भगवती की जो कोई भी आराधना करले तो जैसे छोटे लड़के बच्चे हैं वो एक चॉकलेट में प्रशन्न हो जाते हैं ऐसे ही माँ भगवती हैं जिनकी आराधना से सबकुछ मिल जाता है इस क्षेत्र के लोगो का सौभाग्य है कि पूज्य द्विपीठाधीस्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने यहाँ माँ बाला त्रिपुर सुंदरी देवी की प्राण प्रतिष्ठा की है।

यह मंदिर एक टेकरी पर स्थापित है जो लगभग 500 मीटर में ऊंचाई में है माँ भगवती के दरवार में शांति का वातावरण है इसके ऊपर से चारो ओर देखने पर हरियाली ही हरियाली नजर आती है नवरात्र के दिनों में विशेषकर अष्टमी के दिन यहा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुचते है एवं शारदेय नवरात्र में जस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जो दिनों तक चलता है जिसमे कई जिलों के जस मंडल आकर अपनी हाजिरी लगाते थे लेकिन इस वर्ष कोरोना की वजह से यह जस प्रतियोगिता का आयोजन कैंसिल कर दिया गया है।
नवरात्रि पर्व भर रात्रि में जसो के भजन कीर्तन प्रतिदिन होते है।
मंदिर परिसर में भगवान शंकर भोलेनाथ भी शिवलिंग के रुप मे स्थापित है जिनकी पूजा अर्चना भी भक्तों द्वारा की जाती है एवं सावन माह एवं महाशिवरात्रि में भगवान शंकर का अभिषेक किया जाता हैं।

वही ब्रह्मचारी राघवानंद ने बताया कि इस वर्ष कोरोना के मद्देनजर मंदिर परिसर में कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को बगैर मास्क के प्रवेश नहीं दिया जाएगा एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हर एक श्रद्धालुओं को करना होगा वहीं उन्होंने बताया कि नवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर परिसर में प्रतिदिन सैनिटाइजर का छिड़काव भी किया जा रहा है। शासन के सभी नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

बाइट- ब्रम्हचारी राघवानंद
बाला भवानी मंदिर पुजारी

रिपोर्ट:- बालमुकुन्द सिंह
सिवनी मध्यप्रदेश

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